
नई दिल्ली Ayodhya land dispute case अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की ओर से गठित मध्यस्थता पैनल ने गुरुवार को सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय को सौंप दी। कोर्ट मामले पर आज यानी शुक्रवार को रिपोर्ट देखकर आगे की कार्यवाही पर फैसला लेगा। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ कर रही है। पीठ में अन्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे, डीवाइ चंद्रचूड़, अशोक भूषण एवं एस. अब्दुल नजीर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने गत 18 जुलाई को अयोध्या मामले में मध्यस्थता के जरिये सुलह का प्रयास कर रहे तीन सदस्यीय पैनल से मध्यस्थता में हुई प्रगति पर रिपोर्ट मांगी थी। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने मध्यस्थता पैनल की प्रगति रिपोर्ट देखने के बाद पैनल को 31 जुलाई तक का समय और दे दिया था, लेकिन कोर्ट ने रिपोर्ट के तथ्यों को सार्वजनिक करने से यह कहते हुए मना कर दिया था कि कोर्ट का शुरुआती आदेश मध्यस्थता कार्यवाही को गोपनीय रखने का था। इसलिए तथ्यों को रिकार्ड पर दर्ज करना उचित नहीं होगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 में राम जन्मभूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। इसमें एक हिस्सा भगवान रामलला विराजमान, दूसरा निर्मोही अखाड़ा व तीसरा हिस्सा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को देने का आदेश था। इस फैसले को भगवान रामलाल विराजमान सहित हिंदू, मुस्लिम सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट में ये अपीलें 2010 से लंबित हैं।
गत आठ मार्च को कोर्ट ने विवाद को मध्यस्थता के जरिये सुलझाने के लिए भेज दिया था और इसके लिए तीन सदस्यों का मध्यस्थता पैनल गठित किया था। इसके अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश एफएमई कलीफुल्ला हैं, जबकि आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू सदस्य हैं। कोर्ट ने शुरू में मध्यस्थता के लिए आठ सप्ताह का समय दिया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 15 अगस्त तक कर दिया था।
इस बीच मुकदमे के पक्षकार गोपाल सिंह विशारद ने अर्जी दाखिल कर कहा कि मध्यस्थता में कुछ ठोस प्रगति नहीं हुई है और इससे विवाद का हल निकलने की उम्मीद नहीं है। कोर्ट मध्यस्थता समाप्त कर अपीलों पर जल्द सुनवाई शुरू करे। इस अर्जी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने गत 11 जुलाई को मध्यस्थता पैनल से 18 जुलाई को प्रगति रिपोर्ट मांगी थी। 18 जुलाई की रिपोर्ट देखने के बाद कोर्ट ने पैनल को एक अगस्त को फिर रिपोर्ट देने को कहा था।